Monday, February 12, 2018

मेरा परिवार

आज बात करूंगा परिवार के कुछ सदस्यों के बारे में जिन्हें मै चाहकर भी भुला नहीं सकता मेरा परिवार जिसमे मै भारत देश की एकता और अखंडता को वीद्दमान पाता हूँ, मेरा परिवार एक संयुक्त परिवार है जो भारत में ख़त्म होने की कगार पर है, और मै भारत वर्ष के लोगो से इसके संरक्षण हेतु आगे आने का आह्वान करता हूँ | मेरे तीन दादाजी और उनका पूरा परिवार, हम सभी एक साथ एक ही घर में रहते है | और शायद इसे एकीकृत और संयुक्त परिवारों के लिए ही हमारे पुर्वाजो ने परिवार शब्द का इस्तेमाल किया था| लेकिन शायद अब सभी परिवार शब्द के मूल आर्थ को ही भूल गएँ है, अरे जिस परिवार में दादा-दादी का प्यार, चाचा-चाची और अन्य सदस्यो का दुलार ना हो, वो कैसा परिवार? आज की स्थिती देखकर तो यह लगता है कि या तो परिवार शब्द इक्कीसवी सदी के लोगो की संकीर्ण मानसिकता का शिकार हो गया | या फिर हमारे पूर्वजो ने भारत सरकार के द्वारा संचालित "परिवार नियोजन" योजना को ज्यादा गंभीरता से ले लिया, और पुरे परिवार का ही नियोजन कर दिया | और मेरा मानना है कि संयुक्त परिवार ही आदर्श परिवार है, और आज के समाज की आवश्यकता है की संयुक्त परिवारकी पद्धती को बढ़ावा देना चाहिए | इसी के साथ अपनी बात ख़त्म करता  हूँ, कल मिलूंगा कुछ नए छुए, अनछुए पहलू को लेकर|

शुभ रात्री |
धन्यवाद |

Friday, August 4, 2017

मेरा गाँव




मेरा गाँव मोहनपुर, कालीन नगरी भदोही जनपद क एक छूता सा गाँव है, क्षेत्रफल की दृष्टी से यह बदतो नहीं है, लेकिन जनसँख्या की दृष्टी से बड़ा है | लेकिन आब नहीं रहा क्योकी आधी से ज्यादा आबादी तो रोजगार की आशा में मुंबई जैसे महानगरो की और पलायन कर चुका है | गाँव के बीचोबीच ही सारी आबादी बसी हुई है और चारो तरफ खेत-खलिहान ऐसे लगते है मानो खुले आसमान के बिच सूरज अपनी छठा बिखेर रहा हो | बाग़-बगीचो के नाम पर कई है, जहाँ अब भी गर्मी के मौसम में आम के पेड़ के निचे कई बच्चे जमा हो जाते है, और दोपहर तो वही ख़त्म होती है | हमारा गाँव भी भारत की ही तरह आर्थीक विषमता का शिकार है, कई धन-धान्य से संपन्न है तो कई रोज कुआँ खोदे तभी पानी मिलता है | सभी आपस में मिलजुलकर रहते है, हमेशा प्रसन्न होते है, दुखी भी होते है तो एक नहीं कई लोग सथ देने को खड़े मिलते है, कभी किसी के यहाँ कुछ भी कार्यक्रम का आयोजन हुआ तो गाँव के बुजुर्ग वहां कार्यक्रम का संचालन बिना सकोच के इस भाव से करते है की इस कार्यक्रम की सारी जिम्मेदारी उन्ही के कंधो पर है| इतना ही नहीं तख़्त, कंडाल (पानी भरने वाले बर्तन), बर्तन और अन्य सामान देकर एक दुसरे की मदद करते है | किसी के घर शादी के समय अगर मेहमान ज्यादा हो गए तो वे पड़ोसी के घर चले जाते है, और उस मेहमान का सत्कार उसी तरह होता है, जैसे अपने मेहमान का सत्कार करते है |  बस, संक्षेप में इतना ही कह सकता हूँ, कि मेरा गाँव अनेकता में एकता का जीता जागता उदाहरण है |
फिर मिलूंगा कुछ बीती बातो के साथ, जिन्हें याद करना एक सुखद अनुभव है |

धन्यवाद |
शुभ रात्री |

Monday, July 31, 2017

श्याम

सुप्रभात मित्रो,

कल वापी, गुजरात में स्थित गायत्री मंदिर पर रामायण पाठ का आयोजन किया गया था| और शाम को भंडारे का आयोजन किया गया था| मै भी शाम के ६ बजे मंदिर परिसर में पंहुचा| तो रामायण पाठ ख़त्म हो चुका था| और भजन शुरू होने वाला था, मैंने देखा एक १२ वर्षीय बालक माइक पर था| और फिर उसने भजन गाना शुरू किया, और शमा बाँध दिया| पूरा मंदिर परिसर श्याममय हो गया था| कुछ विडियो यूट्यूब के माध्यम से प्रस्तुत कर रहा हूँ|




आशा है आपको पसंद आयेगी|

मेरे मन की

मेरी पहली पुस्तक "मेरे मन की" की प्रिंटींग का काम पूरा हो चुका है | और यह पुस्तक बुक स्टोर पर आ चुकी है| आप सब ऑनलाइन गाथा ...