"" Mere Man Kee

Monday, October 15, 2018

An Unknown Journey

#Struggle and #Victory 


हरिया ने अपनी बेटी को उठाते हुए कहा - "उठ बेटी! सूरज सर पर चढ़ आया है| अभी खेत में बहूत सारा काम बाकी है, और अभी एक-दो घंटे में तो धरती भी तपने लगेगी|"

हरिया के बेटी पूनम ने सिर्फ करवट बदली और कहा - "बाबू! थोड़ी देर और सोने दो न.." और फिर सो गयी

हरिया ने फिर से जोर देकर कहा - "चल उठ जा ... नहीं तो मै चलता हूँ|"

और हरिया ने किल पर लटकी हुई साड़ी के किनारे को काटकर बनाई गयी रस्सी उतारी और हसिया उठाया और घर से बाहर निकला तो देखता है पूनम दरवाजे के पास खड़ी उसका इंतजार कर रही थी, और हरिया मुस्कुरा उठा| यह एन दोनों के जीवन का रोज का काम था| और फिर दोनों खेत पर निकल गए|

पूनम अब बड़ी हो गयी थी, उसे पूनम को काम पर ले जाना बिलकुल अच्छा नहीं लगता था, लेकिन पूनम की माँ के गुजर जाने के बाद हरिया एकदम टूट सा गया था, एकदम अकेला हो गया था, ऊपर से पूनम की परवरिश की चिंता अलग| लेकिन हरिया ने हार नहीं मानी| वो जहाँ भी जाता पूनम को साथ ले जाता| पूनम की जिन्दगी के अब तक के ज्यादातर वक्त खेत-खलिहानों, बाग-बगीचों में ही बीते थे| अब तो पूनम को एक अलग सा लगाव हो गया है इस धरती से, इन खेतो से| जिसदिन वह खेतो पर नहीं जाती, इस कदर बेचैन हो उठती जैसे किसी ने उसकी सांसे छीन ली हो उससे, पता नहीं हरिया कि वजह से या खेतो की वजह से|

हरिया की भी अब उम्र हो चली थी, ये तो उसका जिद्दी स्वभाव था जिसकी वजह से वह अभी भी खेतो पर जाता था नहीं तो उसकी उम्र के लोगो ने तो खाट पकड़ ली है| और पूनम को भी इस बात का अंदाजा हो चला था की हरिया अब बूढा हो गया है लेकिन मेरी जिम्मेदारियों की वजह से वह घर नहीं बैठ सकता है| वह कभी - कभी कह भी देती थी कि अब आपको खेतो पर जाने की कोई आवश्यकता नहीं है, मै आब बड़ी हो गयी हूँ, सारा काम खुद कर सकती हूँ| तो हरिया दिल की बात को छुपाते हुए कहता - "हाँ! पूरा गाँव मुझपर थूकेगा, कहेगा बेटी काम करती है और ये बैठकर खाता है|"

लेकिन सच बात तो यह है की उसे पूनम के दूर चले जाने की बात सोचकर ही दर लगता था| वह ये सोच ही नहीं सकता था की पूनम शादी के बाद अपने घर चली जायेगी| और उसे लगता था कि पूनम उसके दिल की बात नहीं जानती| लेकिन उसे नहीं पता था कि "अपनों के दिलों के भेद नहीं होते बल्कि हर राज आईने की तरह साफ होते है|" 

पूनम और हरिया शाम को जब घर लौटते तो हरिया खुद खाना बनाता तो पूनम उसकी चुटकी लेते हुए कहती - "हरिया तू अपनी लडकी से खेतो में मर्दों वाले काम करवाता है और खुद औरतो की तरह चुल्हा-चौका करता है|"

तो हरिया मुस्कुराते हुए कहता - "मेरी बेटी मर्दों से कम है क्या?, मूंछ होने से कोई मर्द थोड़ी न बनता है|"
और फिर दोनों जोर-जोर से हसते| लेकिन असली बात यह है कि खेतो पर काम करने के बाद हरिया पूनम को और काम करने के लिए नहीं बोल पाता था| और अब उसे आदत सी हो गयी थी रोज खाना बनाने की और पूनम को खिलाने की|

खेतो में हरिया और पूनम खूब मस्ती करते| हरिया अगर ५० किलो वजन उठाता तो पूनम ५५ किलो| और यह सिलसिला चलता रहता| और अंत में पूनम के चहरे पर विजयी मुस्कान देखने के लिए खुद हार जाता और कहता और नहीं उठा पाउँगा|

एक दिन रोज की तरह हरिया और पूनम दोनों खेतो पर काम कर रहे थे| तभी एक बड़ी सी गाडी उधर से गुज़री| और फिर गाडी में बैठे व्यक्ती ने पूछा – “ठाकुर साहब का घर कहाँ है?”

हरिया अपने काम में व्यस्त रहा तो वह व्यक्ती गाडी से उतरकर नीचे आया और फिर पुछा – “मुझे ठाकुर साहब के यहाँ जाना था?”

जब वह व्यक्ती रास्ता पूँछ रहा था तब भी और जब हरिया रास्ता बता रहा था तब भी, उसकी नजर पूनम पर ही थी, हरिया को यह अच्छा नहीं लग रहा था| तो उसने जल्दी से ठाकुर साहब के घर का रास्ता उसको बता दिया|
वह व्यक्ती चला तो गया, लेकिन जाते वक्त भी उसकी नजर गाड़ी से पूनम को ही देखे जा रहे थी|

ठाकुर साहब बहूत ही नेक इन्सान है, उनके पूर्वज यहाँ के राजा हुआ करते थे| अब राज-पाठ तो चला गया, लेकिन ठाकुर साहब आये दिन गाँव वालो की मदद करते रहते है| वह हमेशा हरिया को कहते – “हरिया पूनम को स्कूल क्यों नहीं भेजता? अभी उसकी उम्र है पढने-लिखने की| जानता है लड़कियां लड़को से किसी भी मामले में कम नहीं है|”

और हरिया यह कहकर टाल देता – “फीस कहाँ से लाऊंगा? और ये पढना चाहे तो मै मेहनत-मजदूरी करके भेज भी दू|”

और ठाकुर साहब हसते हुए पूनम से पुछते – “क्या पूनम, तुझे स्कूल जाने का मन नहीं करता|”

तो पूनम कहती – “नहीं मालिक, मुझे जो मजा खेत में काम करके, बोझ उठाके मिलता है वो मजा वो बंद स्कूल में नहीं मिलता|”


उस दिन शाम को जब हरिया और पूनम काम से लौट रहे थे, तो रस्ते में वही गाडी वाले बाबू मिले| और मिलते ही बोले – “आप तो वही है ना जो खेत में सुबह मिले थे|”

हरिया ने उत्तर दिया – “हाँ|”

फिर उन्होंने कहा – “मै ठाकुर साहब के यहाँ ठहरा हूँ, गाँव घुमने के लिए आया हूँ|”

और फिर पूनम से बोले – “आपने तो बहूत वजन उठाया है लाईये हमें दे दीजिये, हम लिए चलते है|”
पूनम ने नकारते हुए कहा – “रहने दीजिये बाबू साहब हम लिए जायेंगे, हमारा तो रोज का काम है| और वैसे भी आपके कपडे ख़राब हो जायेंगे|”

लेकिन वो नहीं माने और बोझ ले लिए| और जैसे ही पूनम ने हाथ हटाया, बाबू साहब बोझ समेत जमीं पर|
हरिया और पूनम दोनों हसने लगे| और हरिया ने मुस्कुराते हुए बाबू साहब को उठाया और कहा – “ये आपके बस की बात नहीं है|”

फिर सभी चलने लगे, उन्होंने अपना नाम अविनाश बताया| उन्होंने अपनी संस्था के बारे में बताया जो गरीब बच्चो की बुनियादी जरूरतों के साथ-साथ भविष्य निर्माण में मदद करती है|

उन्होंने पूनम की पढाई के बारे में पुछा तो हरिया में दबे हुए स्वर में कहा - “हमारी किस्मत में यह कहाँ? अगर यह खेतो पर काम नहीं करे तो हम दोनों भुखे मर जाये|”

फिर हरिया ने सारी कहानी सुना दी और तब तक हरिया का घर आ गया| हरिया अविनाश के लिए पानी लाने गया| तभी अविनाश ने पूनम से पुछा – “आगे क्या करना है? पढाई करना चाहती हो या शादी करके चुल्हा-चौका?”

पूनम ने कहा – “करना तो बहूत कुछ चाहती हूँ लेकिन बाबा ....उन्हें ऐसे नहीं छोड़ सकती|”

तबतक हरिया देशी गुड़ का एक ढेला और कुए से पानी लेकर आया|

थोड़ी देर तक बाते होती रही सूरज ढल चूका था, तो अविनाश भी जाने लगे तो हरिया उन्हें बाहर तक छोड़ने आया और अविनाश ने उन्हें पूनम की इच्छा के बारे में बताया|

हैरान होकर हरिया ने कहा – “लेकिन पूनम ने मुझसे आज तक कभी भी इस बात का जिक्र तक नहीं किया|”

तो अविनाश ने उत्तर दिया – “वह आपको दुखी नहीं देख सकती है, यही वजह है की उसने अपनो को उड़ान देने के बजाय, उसे अपने दिल के किसी कोने में दबा दिया है| लेकिन अगर आप उससे यह पहल करो तो वह मना नहीं कर पायेगी| वह आपके लिए अपनी खुशियों और सपनों का गला घोट रही है|”

हरिया ने चिंतित स्वर में कहा – “आप चलिए, मै कल आता हूँ|”

अगली सुबह हरिया भोर में ही उठा, वैसे भी उसको सारी रात नींद ही किधर आयी, बस करवटे लेता रहा| उसने पैदल ही ठाकुर साहब की हवेली का रुख कर लिया| उसने अब मन बना लिया था की वह जैसे तैसे गुजारा कर लेगा लेकिन पूनम के सपनों को इस तरह बिखरने नहीं देगा| यही सब सोचता वह तेज कदमो से हवेली की ओर बढ़ा जा रहा था| पैरो में जैसे पहिये लग गए थे|

वह पंहुचा तो बरामदे में पहले ही ठाकुर साहब और अविनाश बाबू चाय की चुस्कियां ले रहे थे|

और ठाकुर साहब ने कहा – “आओ हरिया! हम तुम्हारा ही इंतज़ार कर रहे थे| हरिया खाट पर निचे बैठने लगा तो ठाकुर साहब ने कहा – “निचे क्यों बैठता है? कुर्सी ले ले|”

और हरिया कुर्सी पर बैठ गया तो ठाकुर साहब ने पुछा – “तो क्या सोचा हरिया?”

हरिया कुछ बोल पाता उससे पहले ही ठाकुर साहब ने आगे कहा – “हरिया पूनम एक आजाद चिड़िया है, उड़ जाने दे उसे| उसके सपने बड़े है| कही ऐसा न हो जाये की तुझे देर हो जाये और उसके सपने उसके अन्दर ही मर जाये| और वो उड़ना भूल जाये| आगे तेरी मर्जी|”

फिर हरिया ने कहा – “अब मै इस चिड़िया को उड़ने से नहीं रोकना चाहता| अविनाश बाबू! इसे ले जाईये खुले आसमान में| जहाँ कोई बंदिशे न हो|”

और फिर एक संतोष और खुशी की रेखा तीनो के चेहरे पर तैर गयी|


और सुबह हरिया ने कहा – “पूनम बिटिया उठ जा| खेतो पर नहीं जाना है क्या?“

पूनम हमेशा की तरह एक बार ना कहा| तो हरिया ने फिर कहा - "चल उठ जा ... नहीं तो मै चलता हूँ|"

और पूनम उठ कर जल्दी से दरवाजे की ओर बढ़ने लगी, तो देखा अविनाश और ठाकुर साहब आकर खड़े है और बाहर उनकी गाडी भी खड़ी है| अभी उसे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था की क्या हो रहा है| फिर उसने दोनों तो प्रणाम किया| पूनम तीनो के चेहरे देखे जा रही थी और सभी के चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कराहट थी|

तभी हरिया ने कहा – “अविनाश बाबू जा रहे है शहर और तुझे भी ले जा रहे है|”

तो पूनम को एकपल के लिए तो लगा की वो सपना देख रही है, लेकिन अगले ही पल दुखी होकर बोली –“मुझे कही नहीं जाना है| और आप कैसे मान गए की मुझे कही जाना है, मुझे आपके साथ रहना है| खेतो पर जाना है और आपके हाथ का बना स्वादिष्ट खाना खाना है, बस|”

तभी ठाकुर साहब बोले – “बिटिया यह तेरे भले के लिए है| वहां तू पढाई के साथ-साथ जो चाहे कर सकती है| और तुमने ही तो अविनाश से कहा की तुम्हे पढना है, आगे बढ़ना है|”

पूनम ने कहा – “वो तो मैंने ऐसे ही कह दिया था, लेकिन मै बाबू को छोड़कर कही नहीं जाउंगी|”

लेकिन फिर जब हरिया, ठाकुर साहब और अविनाश ने मिलकर उसे समझाया की हरिया उसके बिना भी अपनी जिन्दगी जी लेगा और ठाकुर साहब उसका ख्याल रखेंगे| और वो हमेशा के लिए थोड़ी न जा रही है, कुछ ही दिनों की तो बात है वो वापस आ जायेगी| और अविनाश ने कहा की छुट्टियों में तो तुम इनसे मिलने आ ही सकती हो| तब जाकर वह जाने के लिए राजी हुई|

हरिया ने उसकी तैयारी इस तरह से शुरू की जैसे कोई आपने लड़की को शादी के बाद विदाई के वक्त करता है| और फिर पूनम और अविनाश गाडी से शहर की ओर चलने को तैयार थे, हरिया के अंदर तो जैसे ज्वार उमड़ रहा था लेकिन उसने उसे बाहर नहीं आने दिया| और फिर भारी मन से उसने पूनम को विदा किया|

३ साल बीत चुके थे, पूनम को गए हुए| हरिया भी बूढ़ा हो गया था, ठाकुर साहब की हवेली पर रखवाली का काम मिल गया था, खाने को भी मिल जाता था| कभी – कभी ठाकुर साहब की फोन पर पूनम का फ़ोन भी आता तो बात हो जाती|


लेकिन अब हरिया को पूनम से मिलने की इच्छा ने वृछ का रूप ले लिया था, अब वह पूनम से मिलकर उसे देखने चाहता था, उससे बात करना चाहता था| मन ही मन उसकी यादो में खो जाता अब तो पूनम बड़ी हो गयी होगी, पता नहीं कैसी दिखती होगी| दुबली तो नहीं हो गयी होगी|....वगैरह ......वगैरह|

एक दिन पूनम का फ़ोन आया तो ठाकुर साहब ने बुलाया, और ठाकुर साहब ने कहा – “हरिया ये ले पूनम बिटिया का फ़ोन है|”

हरिया ने फ़ोन लिया तो पूनम ने बताया की आज वह टीवी पर आने वाली है, हरिया को खुशी का ठिकाना न रहा| वह और भी बहूत कुछ पूछना चाहता था पूनम से लेकिन फ़ोन कट गया|

ठाकुर साहब और उनका पूरा परिवार टीवी के सामने था| और ठाकुर साहब ने हरिया को भी बुलवाया और बैठने के लिए कहा| सभी की नज़ारे टीवी की ओर और सिर्फ पूनम को ढूढती हुई| तभी पूनम बिटिया दिखाई दी सभी खूब चिल्ला रहे थे, सभी लोग खाभी टीवी की ओर देखते कभी हरिया की ओर| और हरिया को तो जैसे सारा जहाँ मिल गया था|

हरिया भी खूब चिल्लाना चाहता था, रोना भी आ रहा था| गर्व से छाती फूल गयी थी, सब सिर्फ पूनम की ही बात कर रहे थे| उसकी बेटी के ही बात कर रहे थे|

सभी लोगो हरिया को बधाई दे रहे थे, लेकिन हरिया को अभी तक पूनम के टीवी पर आने और लोगो के बधाई देने का कारण समझ नहीं आ रहा था|

तभी ठाकुर साहब ने बताया की पूनम बिटिया अपने देश के लिए खेल रही है कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा लिया है उसने| फिर ठाकुर साहब ने कहा – “पूनम बिटिया ने तुम्हारा और इस गाँव का ही नहीं पूरे देश का नाम रौशन कर दिया है|”


हरिया को लगा जैसे अभी अभी किसी ने उसके सीने पर मरहम लगाया हो, जो जख्म पूनम के जाने पर हुआ था|


आपका ब्लॉग पर आने के लिए आभार, हमारे मार्गदर्शन हेतु पुनः पधारें | क्योकी आपके आगमन से ही हमारे लेखन में उत्साह की वृद्धी होती है | धन्यवाद |

मेरे मन की

Labels

#Struggle and #Victory A story About Me About My Life About My Village An Unknown Journey Anand shivhare ashok babu mahaur atiya noor Autobiography bachpan Bakhashis beautiful Beautiful Bhojpuri Song by Rekha Ji beauty bechare neta jee bhajan Bhojpuri Biography Biopic blog blogger blogging book childhood chunav aa gaya clean india clean india misson comedy cow cute cuteness deepika maheshwari dharm digital Duniya Nahi Kuchh Mujhe Dene Vali education election 2015 election 2019 Election in India environment Faimily Foolish Boy forest friends Fulon Me bhi gajal Gaon geet gift GIRL got Grandfather greenery guilty gujarat happiness happy Hindi hindi kavita manch Hindi Story hindu home honesty house I india indian Indian Leaders Innocence intolerance intolerance in India intolerant Itti si khushi jim carbet jungle kahanee kahani kanha Kanto me bhee Kasurvar Kaun kavita keetab khubshurat lekh Love maa Maha Shivaratri mandir masumiyat Mat Kato In Pedon Ko Mera Gaon Mera Ghar Mera Parivaar Mere Dadaji mere man kee meremankee Milk Mobile modi mother murkh radheshyam muslim My Faimily My Grandfather My Life My Village nainital Nainital trip national park online gatha parents phone poem poetry politics pollution Pratilipi president radhe rajniti rekha ji Rishabh Rishabh Shukla sarv shiksha abhiyan school chale ham Sharmili Short Story Shukla shyam So Ja Nanhe Munhe So Ja song stories stories on intolerance Story story for kids story of corruption story of my life story on clean india campaign story on election story on honesty story on Intolerance Story on Intolerant story on kindness story on leader story on TV story sab padhe sab badhe swachchh bharat abhiyan tiger Tolerance tourist train travel tree uttarakhand Vasim Mahshar Saurikhi video Village vote vyang Who's guilty? you tube अद्भुत संयोग असहिष्णुता इत्ती सी खुशी ऋषभ शुक्ला ऑनलाइन गाथा कसूरवार कौन ? कहानी किताब चुनाव आ गया ! टी.वी. दूध पुस्तक बख्शीस बदरा घिर आये बेचारे नेता जी महाशिवरात्री मासूमीयत मुर्ख राधेश्याम मूर्ख राधेश्याम मेरा गाँव मेरा घर मेरा परिवार मेरी जिंदगी एक कहानी मेरे दादाजी मेरे बारे में मेरे मन की शर्मीली शिव श्याम सो जा नन्हे-मुन्हे सो जा