Friday, August 4, 2017

मेरा गाँव




मेरा गाँव मोहनपुर, कालीन नगरी भदोही जनपद क एक छूता सा गाँव है, क्षेत्रफल की दृष्टी से यह बदतो नहीं है, लेकिन जनसँख्या की दृष्टी से बड़ा है | लेकिन आब नहीं रहा क्योकी आधी से ज्यादा आबादी तो रोजगार की आशा में मुंबई जैसे महानगरो की और पलायन कर चुका है | गाँव के बीचोबीच ही सारी आबादी बसी हुई है और चारो तरफ खेत-खलिहान ऐसे लगते है मानो खुले आसमान के बिच सूरज अपनी छठा बिखेर रहा हो | बाग़-बगीचो के नाम पर कई है, जहाँ अब भी गर्मी के मौसम में आम के पेड़ के निचे कई बच्चे जमा हो जाते है, और दोपहर तो वही ख़त्म होती है | हमारा गाँव भी भारत की ही तरह आर्थीक विषमता का शिकार है, कई धन-धान्य से संपन्न है तो कई रोज कुआँ खोदे तभी पानी मिलता है | सभी आपस में मिलजुलकर रहते है, हमेशा प्रसन्न होते है, दुखी भी होते है तो एक नहीं कई लोग सथ देने को खड़े मिलते है, कभी किसी के यहाँ कुछ भी कार्यक्रम का आयोजन हुआ तो गाँव के बुजुर्ग वहां कार्यक्रम का संचालन बिना सकोच के इस भाव से करते है की इस कार्यक्रम की सारी जिम्मेदारी उन्ही के कंधो पर है| इतना ही नहीं तख़्त, कंडाल (पानी भरने वाले बर्तन), बर्तन और अन्य सामान देकर एक दुसरे की मदद करते है | किसी के घर शादी के समय अगर मेहमान ज्यादा हो गए तो वे पड़ोसी के घर चले जाते है, और उस मेहमान का सत्कार उसी तरह होता है, जैसे अपने मेहमान का सत्कार करते है |  बस, संक्षेप में इतना ही कह सकता हूँ, कि मेरा गाँव अनेकता में एकता का जीता जागता उदाहरण है |
फिर मिलूंगा कुछ बीती बातो के साथ, जिन्हें याद करना एक सुखद अनुभव है |

धन्यवाद |
शुभ रात्री |

Monday, July 31, 2017

श्याम

सुप्रभात मित्रो,

कल वापी, गुजरात में स्थित गायत्री मंदिर पर रामायण पाठ का आयोजन किया गया था| और शाम को भंडारे का आयोजन किया गया था| मै भी शाम के ६ बजे मंदिर परिसर में पंहुचा| तो रामायण पाठ ख़त्म हो चुका था| और भजन शुरू होने वाला था, मैंने देखा एक १२ वर्षीय बालक माइक पर था| और फिर उसने भजन गाना शुरू किया, और शमा बाँध दिया| पूरा मंदिर परिसर श्याममय हो गया था| कुछ विडियो यूट्यूब के माध्यम से प्रस्तुत कर रहा हूँ|




आशा है आपको पसंद आयेगी|

Sunday, July 30, 2017

मेरे बारे में....

पोस्ट क्रमांक - १ -:- मेरी जिंदगी…………………एक कहानी



मै ........., छोड़िये भी | यहाँ, मेरे नाम से कोई फर्क नहीं पड़ताक्योंकि यह अधिक प्रभावशाली  नहीं है |
मैंने अपने जीवन के २० वर्ष पूरे कर लिए है | मैं  भदोही से हूँ, जो पूरी दुनिया में अपने वस्त्र निर्यात के लिए जाना जाता है। मेरे पास अपने बारे में बताने के लिए कोई और अधिक सामग्री नहीं है, क्योकी मै अभी खुद को भी अच्छी तरह से कोशिश कर रहा हूँ, और यह कोशिश ताउम्र चलाती रहेगी | मेरा जन्म सन 1993 की 17 जुलाई को हुआ। मेरा 40 से अधिक सदस्यों का एक संयुक्त परिवार है। मेरे परिवार के ज्यादातर सदस्य घर में ही रहते हैं। लेकिन, मैं पिछले 2 से 3 साल अपने चाचा के साथ मुंबई में रहता हूँ। मैंने सन 2014 में कानपुर विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई अंग्रेजी साहित्य से पूरी की | मैं मेरे वित्तीय कारणों से अपना अध्ययन जारी नहीं रख सका। मेरे पिता एक संतुष्ट इंसान है और जिन्दगी को अपनी शर्तो पर जीने वाले इंसान है | मेरी माँ जो बहूत ही नेकदिल और बेइंतहा प्यार करने वाली महिला है, उन्होंने हमारे लिए, हमारी खुशियों के लिए अपनी करोणों इच्छाओं का गला घोट दिया | वह हमेशा खुश दिखने की कोशिश में रहती है, लेकिन उन्हें डर है की कोई उनकी आँखों में छुपे दर्द को देख ना ले | मेरे दादाजी जो मुझे सबसे ज्यादा समझाने और प्यार करने वाले इंसान थे | वही एक ऐसे व्यक्ती है जिनसे मै सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ हूँ और उन्ही के जैसा बनना ही मेरी जिन्दगी का मकसद है, और कोई ऐसा नहीं है जिसे मै समझता हूँ और जहां तक मेरा मानना है कोई भी मुझे नहीं समझता है | फिर मिलूंगा अगले पड़ाव पर जहां मै कोशिश करूंगा जिन्दगी को अपनी नजरो से देखने की |

धन्यवाद |

मेरे मन की

मेरी पहली पुस्तक "मेरे मन की" की प्रिंटींग का काम पूरा हो चुका है | और यह पुस्तक बुक स्टोर पर आ चुकी है| आप सब ऑनलाइन गाथा ...