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गुरुवार, 28 अक्टूबर 2021

Chunav Aa Gaya / चुनाव आ गया / Election Has Arrived

Chunav Aa Gaya / चुनाव आ गया (Election Has Arrived)


Chunav Aa Gaya / चुनाव आ गया (Election Has Arrived)



घनश्याम बाहर बैठकर महीने का हिसाब ठीक कर रहा था की कही से खेलकर आते हुए उनके आठ वर्षीय बेटे गुड्डू ने पास आकर पुछा - "पापा! क्या कोई त्यौहार आने वाला है?"

पापा ने कुछ सोचकर बोला - "नहीं तो|"

फिर गुड्डू ने पूछा - "आजकल गाँव में सभी खुश है क्योकी रोज कोई सफेद कपड़े पहने अंकल आते है, सभी के घर जाकर उनसे बाते करते है और अनाज, कपडे, मिठाइयाँ और पैसे भेट में देते है| अपने घर भी आये थे मुझे मिठाई का एक डिब्बा दिया और आपके बारे में पूछ रहे थे| दादी के पैर भी छुए और चले गए | आज फिर वैसे ही कपडे पहने दुसरे व्यक्ती गाँव में आये हुए है और कम्बल बाट रहे है |"


और इतना कहकर घनश्याम किसी गहरी सोच में डूब गए और गुड्डू ने ना समझते हुए भी संतुष्ट होने का बहाना किया जैसे सब कुछ समझ गया हो |


@ ऋषभ शुक्ला


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बुधवार, 27 अक्टूबर 2021

Mera Parivar / मेरा परिवार (My Family)

Mera Parivar / मेरा परिवार (My Family)


Mera Parivar / मेरा परिवार (My Family)



आज बात करूंगा परिवार के कुछ सदस्यों के बारे में जिन्हें मै चाहकर भी भुला नहीं सकता मेरा परिवार जिसमे मै भारत देश की एकता और अखंडता को वीद्दमान पाता हूँ, मेरा परिवार एक संयुक्त परिवार है जो भारत में ख़त्म होने की कगार पर है, और मै भारत वर्ष के लोगो से इसके संरक्षण हेतु आगे आने का आह्वान करता हूँ | मेरे तीन दादाजी और उनका पूरा परिवार, हम सभी एक साथ एक ही घर में रहते है | और शायद इसे एकीकृत और संयुक्त परिवारों के लिए ही हमारे पुर्वाजो ने परिवार शब्द का इस्तेमाल किया था| लेकिन शायद अब सभी परिवार शब्द के मूल आर्थ को ही भूल गएँ है, अरे जिस परिवार में दादा-दादी का प्यार, चाचा-चाची और अन्य सदस्यो का दुलार ना हो, वो कैसा परिवार? आज की स्थिती देखकर तो यह लगता है कि या तो परिवार शब्द इक्कीसवी सदी के लोगो की संकीर्ण मानसिकता का शिकार हो गया | या फिर हमारे पूर्वजो ने भारत सरकार के द्वारा संचालित "परिवार नियोजन" योजना को ज्यादा गंभीरता से ले लिया, और पुरे परिवार का ही नियोजन कर दिया | और मेरा मानना है कि संयुक्त परिवार ही आदर्श परिवार है, और आज के समाज की आवश्यकता है की संयुक्त परिवारकी पद्धती को बढ़ावा देना चाहिए | 
इसी के साथ अपनी बात ख़त्म करता  हूँ, कल मिलूंगा कुछ नए छुए, अनछुए पहलू को लेकर|

शुभ रात्री| धन्यवाद|

@ ऋषभ शुक्ला


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शुक्रवार, 6 अगस्त 2021

Mera Gaon / मेरा गाँव (My Village)


Mera Gaon / मेरा गाँव (My Village)


मेरा गाँव मोहनपुर, कालीन नगरी भदोही जनपद का एक छोटा सा गाँव है, क्षेत्रफल की दृष्टी से यह बड़ा तो नहीं है, लेकिन जनसँख्या की दृष्टी से बड़ा है | लेकिन अब नहीं रहा, क्योकी आधी से ज्यादा आबादी तो रोजगार की आशा में मुंबई जैसे महानगरो की ओर पलायन कर चुका है | गाँव के बीचोबीच ही सारी आबादी बसी हुई है और चारो तरफ खेत-खलिहान ऐसे लगते है मानो खुले आसमान के बिच सूरज अपनी छठा बिखेर रहा हो | बाग़-बगीचो के नाम पर कई है, जहाँ अब भी गर्मी के मौसम में आम के पेड़ के निचे कई बच्चे जमा हो जाते है, और दोपहर तो वही ख़त्म होती है | हमारा गाँव भी भारत की ही तरह आर्थीक विषमता का शिकार है, कई धन-धान्य से संपन्न है तो कई रोज कुआँ खोदे तभी पानी मिलता है | सभी आपस में मिलजुलकर रहते है, हमेशा प्रसन्न होते है, दुखी भी होते है तो एक नहीं कई लोग सथ देने को खड़े मिलते है, कभी किसी के यहाँ कुछ भी कार्यक्रम का आयोजन हुआ तो गाँव के बुजुर्ग वहां कार्यक्रम का संचालन बिना सकोच के इस भाव से करते है की इस कार्यक्रम की सारी जिम्मेदारी उन्ही के कंधो पर है| इतना ही नहीं तख़्त, कंडाल (पानी भरने वाले बर्तन), बर्तन और अन्य सामान देकर एक दुसरे की मदद करते है | किसी के घर शादी के समय अगर मेहमान ज्यादा हो गए तो वे पड़ोसी के घर चले जाते है, और उस मेहमान का सत्कार उसी तरह होता है, जैसे अपने मेहमान का सत्कार करते है |  बस, संक्षेप में इतना ही कह सकता हूँ, कि मेरा गाँव अनेकता में एकता का जीता जागता उदाहरण है |
फिर मिलूंगा कुछ बीती बातो के साथ, जिन्हें याद करना एक सुखद अनुभव है |

धन्यवाद| शुभ रात्री|

@ ऋषभ शुक्ला


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गुरुवार, 13 मई 2021

Mere Bare Mein / मेरे बारे में / About Me


Mere Bare Mein.... / मेरे बारे में.... (About Me)


Mere Bare Mein / मेरे बारे में / About Me


मै ........., छोड़िये भी | यहाँ, मेरे नाम से कोई फर्क नहीं पड़ताक्योंकि यह अधिक प्रभावशाली  नहीं है |
मैंने अपने जीवन के २० वर्ष पूरे कर लिए है | मैं  भदोही से हूँ, जो पूरी दुनिया में अपने वस्त्र निर्यात के लिए जाना जाता है। मेरे पास अपने बारे में बताने के लिए कोई और अधिक सामग्री नहीं है, क्योकी मै अभी खुद को भी अच्छी तरह से कोशिश कर रहा हूँ, और यह कोशिश ताउम्र चलाती रहेगी | मेरा जन्म सन 1993 की 17 जुलाई को हुआ। मेरा 40 से अधिक सदस्यों का एक संयुक्त परिवार है। मेरे परिवार के ज्यादातर सदस्य घर में ही रहते हैं। लेकिन, मैं पिछले 2 से 3 साल अपने चाचा के साथ मुंबई में रहता हूँ। मैंने सन 2014 में कानपुर विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई अंग्रेजी साहित्य से पूरी की | मैं मेरे वित्तीय कारणों से अपना अध्ययन जारी नहीं रख सका। मेरे पिता एक संतुष्ट इंसान है और जिन्दगी को अपनी शर्तो पर जीने वाले इंसान है | मेरी माँ जो बहूत ही नेकदिल और बेइंतहा प्यार करने वाली महिला है, उन्होंने हमारे लिए, हमारी खुशियों के लिए अपनी करोणों इच्छाओं का गला घोट दिया | वह हमेशा खुश दिखने की कोशिश में रहती है, लेकिन उन्हें डर है की कोई उनकी आँखों में छुपे दर्द को देख ना ले | मेरे दादाजी जो मुझे सबसे ज्यादा समझाने और प्यार करने वाले इंसान थे | वही एक ऐसे व्यक्ती है जिनसे मै सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ हूँ और उन्ही के जैसा बनना ही मेरी जिन्दगी का मकसद है, और कोई ऐसा नहीं है जिसे मै समझता हूँ और जहां तक मेरा मानना है कोई भी मुझे नहीं समझता है | फिर मिलूंगा अगले पड़ाव पर जहां मै कोशिश करूंगा जिन्दगी को अपनी नजरो से देखने की |

धन्यवाद |

ऋषभ शुक्ला

Mere Man Kee / मेरे मन की


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बुधवार, 16 सितंबर 2020

Rashtrapati Chunav / राष्ट्रपती चुनाव / President Election

Rashtrapati Chunav / राष्ट्रपती चुनाव / President Election


शुभ संध्या मित्रो,

काफी खीचतान के बाद ही सही, लेकिन राम नाथ कोविंद जी भारत देश के प्रथम व्यक्ती चुने गए| देश को इससे कितना फायदा होगा| फायदा तो होगा, जरूर होगा, लेकिन अगर कोविंद जी बिना, किसी खीचतान के राष्ट्रपती चुन लिए गए होते| इस देश का सबसे में जो कुछ भी होता है, जाती और धर्म पर ही शुरू होता है और उसी पर ख़त्म| चाहे वो गाव के सरपंच के लिए चुनाव हो या प्रधानमंत्री पद के लिए चुनाव हो| मन की इसी विभीन्न जातीय और धार्मिक विविधताओं के लिए भारत वर्ष विश्व विख्यात है, लेकिन अब यही हमारे लिए जी का जंजाल बन चुका है| अब राष्ट्रपती चुनाव को ही ले लीजिये, भाजपा के पास राष्ट्रपती पद के लिए कई उपयुक्त दावेदार थे| और मीडीया ने तो चुन भी लिया था, लेकिन तभी, भाजपा ने जातीय ट्रंप कार्ड खेलकर कांग्रेस सहित कई विपक्षी पार्टियों को चारो खाने चित्त कर दिया| अब कांग्रेस के पास दलित उम्मीदवार उतारने के अलावा कोई विकल्प बचा ही नहीं| तो उन्होंने भी पूर्व लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार को मैदान में उतारकर, इसे राष्ट्रपती चुनाव से दलित और सर्वश्रेष्ठ दलित का चुनाव बना दिया| और ऐसा नहीं है यह पहली बार हुआ है या सिर्फ कांग्रेस ही जाति या धर्म की राजनिती करती है| बल्कि हमारे देश की सम्पूर्ण राजनिती जाति और धर्म से प्रेरित है| कभी यह हिन्दू - मुस्लिम, कभी सवर्ण - दलित औरज तो हद हो गयी, अब दलित और अधिक दलित के रूप में यह सामने आया है| जो भी है विरोध वैचारिक होना चाहिए, विरोध सही और गलत के बीच होना चाहिए, न की जाति और धर्म के नाम पर|

Rashtrapati-Chunav-President-Election

Rashtrapati Chunav / राष्ट्रपती चुनाव / President Election

एक माँ का पुत्र हूँ मै, एक की है देश,
एक ही है भेष मेराएक ही समाज है|

हम सब है एक भरत वंशज,
एक ही है धरती और एक ही आकाश है||

ऋषभ शुक्ला

मेरे मन की / Mere Man Kee


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शनिवार, 12 सितंबर 2020

Mere Man Kee / मेरे मन की / Hindi Story and Poetry Book

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Mere Man Kee / मेरे मन की / Hindi Story and Poetry Book

Mere Man Kee / मेरे मन की (Hindi Story and Poetry Book)



मेरी पहली पुस्तक "मेरे मन की" की प्रिंटींग का काम पूरा हो चुका है | और यह पुस्तक बुक स्टोर पर आ चुकी है| आप सब ऑनलाइन गाथा के द्वारा बुक कर सकते है| मेरी पहली बुक कविताओ और कहानीओ का अनुपम संकलन है| 


आप सभी इसे ऑनलाइन गाथा (Online Gatha) के ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर भी ऑर्डर कर सकते है| इसे अभी ऑर्डर करने के लीये इस लींक पर जाएं| 


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शुक्रिया


ऋषभ शुक्ला

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सोमवार, 31 अगस्त 2020

Mere Dadaji / मेरे दादाजी / My Grandfather

Mere-Dadaji-My-Grandfather

Mere Dadaji / मेरे दादाजी / My Grandfather


Mere Dadaji / मेरे दादाजी (My Grandfather)


मेरा पूरा गाँव मेरे परीवार के प्रत्येक सदस्य को सम्मान की दृष्टी से देखता था, अभी भी वह सम्मान बरकरार है या नहीं यह कहना थोड़ा मुश्किल है | लेकिन जो सम्मान मुझे भी मिलता आया है उसे मै अपनी बड़ी उपलब्धी मानता आया हूँ, (संभवतः अब यह भ्रम टूट गया है)| गाँव में सभी अपनो से बड़ो या छोटो को भी जिन्हें सम्मान देना होता है उसे "पालागी" (इस शब्द को मै अभी तक नमस्ते का समानार्थी शब्द मानता आया हूँ, लेकिन शायद इस शब्द का अर्थ निकलना मेरी सबसे बड़ी भूल होगी) कहकर संबोधित करते है | मेरे दादाजी जो उस समय ग्राम प्रधान थे जब मै पैदा भी नहीं हुआ था, उन्हें पुरे गाँव बहूत सम्मान की दृष्टी से देखता था, मेरा भ्रम भी अब जाकर टूटा की गाँव वाले मुझे सम्मान देकर दादाजी के प्रती सम्मान प्रदर्शीत करते थे |

ऋषभ शुक्ला

मेरे मन की / Mere Man Kee


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मंगलवार, 14 अप्रैल 2020

Corona Virus / कोरोना वायरस

कोरोना वायरस क्या है? इसकी उत्पत्ति कहाँ और कैसे हुई?

कोरोनावायरस (Coronavirus) कई वायरसो का एक समूह है जो स्तनधारियों और पक्षियों में रोग के कारक होते हैं। यह आरएनए वायरस होते हैं। मानवों में यह श्वास तंत्र संक्रमण के कारण होते हैं, जो कभी-कभी जानलेवा होते हैं।गाय और सूअर में यह अतिसार और मुर्गियों में यह ऊपरी श्वास तंत्र के रोग के कारण बनते हैं। इनकी रोकथाम के लिए कोई टीका (वैक्सीन) या वायररोधी (antiviral) अभी उपलब्ध नहीं है और उपचार के लिए प्राणी की अपने प्रतिरक्षा प्रणाली पर निर्भर करता है ताकि संक्रमण से लड़ते हुए शरीर की शक्ति बनी रहे।
चीन के वूहान शहर से उत्पन्न होने वाला 2019 नोवेल कोरोनावायरस इसी समूह के वायरसों का एक उदहारण है, जिसका संक्रमण सन् 2019-20 काल में तेज़ी से उभरकर पूरे विश्व फैलता जा रहा है। हाल ही में WHO ने इसका नाम COVID-19 रखा है| 

Corona Virus / कोरोना वायरस 


कोरोना वायरस द्वारा अब तक संपूर्ण विश्व में जन-धन की क्षति

चीन के वुहान से शुरू हुआ कोरोना वायरस (Coronavirus disease - COVID-19) अब तक 170 से ज्यादा देशों में पहुंच गया है. इसके संक्रमण से मरने वाले लोगों की संख्या 11,401 हो गई है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) ने इसे महामारी घोषित कर दिया है|

दुनिया भर में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या 2,50,650 के पार चली गयी है| कोरोना से दुनिया भर में अब तक 11,401 लोगों की मौत हो चुकी हैं| अब तक चीन में मरने वालो की संख्या 3200, इटली में 2158, ईरान में 853 और दक्षिण कोरिआ में 81 के पर पहुंच गयी है|

दुनिया भर की सरकारें कोरोना वायरस को लेकर लोगों को जागरूक करने पर ध्यान दे रही हैं. जानकारों का कहना है इसके संक्रमण को फैलने से रोककर ही इसे काबू में किया जा सकता है. इसके लक्षणों को पहचानकर ही कोरोना वायरस की बेहतर तरीके से रोकथाम की जा सकती है| 


कोरोना वायरस के लक्षण और इससे बचाव के उपाय

यह बुखार, जुकाम, सांस लेने में तकलीफ, नाक बहना और गले में खराश जैसी समस्या उत्पन्न होती हैं| यह वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है, इसलिए इसे लेकर बहुत सावधानी बरती जा रही है| कुछ मामलों में कोरोना वायरस घातक भी हो सकता है, खास तौर पर अधिक उम्र के लोग और जिन्हें पहले से अस्थमा, डायबिटीज़ और हार्ट की बीमारी है| 

स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय ने कोरोना वायरस से बचने के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं| इनके मुताबिक, हाथों को साबुन से धोना चाहिए| अल्‍कोहल आधारित हैंड रब का इस्‍तेमाल भी किया जा सकता है| खांसते और छीकते समय नाक और मुंह रूमाल या टिश्‍यू पेपर से ढककर रखें| जिन व्‍यक्तियों में कोल्‍ड और फ्लू के लक्षण हों उनसे दूरी बनाकर रखें| अंडे और मांस के सेवन से बचें| जंगली जानवरों के संपर्क में आने से बचें|

भारत में कोरोना वायरस का असर और बचाव कार्य

भारत में कोरोना से संक्रमण के मामलों की संख्या 321 है| जिसमे से 65 मामले आज के है| सरकार ने कोरोना से निपटने के लिए कई प्रभावशाली कदम उठाये है| भारत के कई बड़े शहरों को 31 मार्च तक बंद करने का फैसला लिया गया है, लोगो से अपील की गयी है की जरूरत के वक्त ही घरो से बाहर निकले| 

आज यानि 22 मार्च को भारत सरकार ने देश भर में जनता कर्फ्यू लगाने की घोषणा की है| जनता कर्फ्यू के लिये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील वक्त की जरूरत है। जब भारत कोरोना से लड़ रहा है, ऐसे में आइये कोविड-19 को पराजित करने की अपनी कोशिश करें। 22 मार्च को सुबह सात बजे से रात नौ बजे तक घरों में ही रहें। अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को भी प्रोत्साहित करें। यह हमारा आंदोलन है और इसे साथ मिलकर हम जीतेंगे।

भारत सरकार ने भी जारी की एडवाइज़री

भारत सरकार ने भी कोरोना वायरस के लक्षण मिलने पर तत्काल स्वास्थ्य केंद्र पर सूचना देने को कहा है. स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से 24 घंटे चलने वाला कंट्रोल रूम तैयार किया गया है. फोन नंबर 011-23978046 के माध्यम से कंट्रोल रूम में संपर्क किया जा सकता है. इसके अलावा ncov2019@gmail.com पर मेलकर के भी कोरोना वायरस के लक्षणों या किसी भी तरह की आशंकाओं के बारे में जानकारी ली जा सकती है.


@ ऋषभ शुक्ला


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मंगलवार, 7 अप्रैल 2020

Sangharksh Aur Vijay / संघर्ष और विजय (Struggle And Victory)



Sangharksh Aur Vijay / संघर्ष और विजय (Struggle And Victory)



हरिया ने अपनी बेटी को उठाते हुए कहा - "उठ बेटी! सूरज सर पर चढ़ आया है| अभी खेत में बहूत सारा काम बाकी है, और अभी एक-दो घंटे में तो धरती भी तपने लगेगी|"

हरिया के बेटी पूनम ने सिर्फ करवट बदली और कहा - "बाबू! थोड़ी देर और सोने दो न.." और फिर सो गयी

हरिया ने फिर से जोर देकर कहा - "चल उठ जा ... नहीं तो मै चलता हूँ|"

और हरिया ने किल पर लटकी हुई साड़ी के किनारे को काटकर बनाई गयी रस्सी उतारी और हसिया उठाया और घर से बाहर निकला तो देखता है पूनम दरवाजे के पास खड़ी उसका इंतजार कर रही थी, और हरिया मुस्कुरा उठा| यह एन दोनों के जीवन का रोज का काम था| और फिर दोनों खेत पर निकल गए|

पूनम अब बड़ी हो गयी थी, उसे पूनम को काम पर ले जाना बिलकुल अच्छा नहीं लगता था, लेकिन पूनम की माँ के गुजर जाने के बाद हरिया एकदम टूट सा गया था, एकदम अकेला हो गया था, ऊपर से पूनम की परवरिश की चिंता अलग| लेकिन हरिया ने हार नहीं मानी| वो जहाँ भी जाता पूनम को साथ ले जाता| पूनम की जिन्दगी के अब तक के ज्यादातर वक्त खेत-खलिहानों, बाग-बगीचों में ही बीते थे| अब तो पूनम को एक अलग सा लगाव हो गया है इस धरती से, इन खेतो से| जिसदिन वह खेतो पर नहीं जाती, इस कदर बेचैन हो उठती जैसे किसी ने उसकी सांसे छीन ली हो उससे, पता नहीं हरिया कि वजह से या खेतो की वजह से|

हरिया की भी अब उम्र हो चली थी, ये तो उसका जिद्दी स्वभाव था जिसकी वजह से वह अभी भी खेतो पर जाता था नहीं तो उसकी उम्र के लोगो ने तो खाट पकड़ ली है| और पूनम को भी इस बात का अंदाजा हो चला था की हरिया अब बूढा हो गया है लेकिन मेरी जिम्मेदारियों की वजह से वह घर नहीं बैठ सकता है| वह कभी - कभी कह भी देती थी कि अब आपको खेतो पर जाने की कोई आवश्यकता नहीं है, मै आब बड़ी हो गयी हूँ, सारा काम खुद कर सकती हूँ| तो हरिया दिल की बात को छुपाते हुए कहता - "हाँ! पूरा गाँव मुझपर थूकेगा, कहेगा बेटी काम करती है और ये बैठकर खाता है|"

लेकिन सच बात तो यह है की उसे पूनम के दूर चले जाने की बात सोचकर ही दर लगता था| वह ये सोच ही नहीं सकता था की पूनम शादी के बाद अपने घर चली जायेगी| और उसे लगता था कि पूनम उसके दिल की बात नहीं जानती| लेकिन उसे नहीं पता था कि "अपनों के दिलों के भेद नहीं होते बल्कि हर राज आईने की तरह साफ होते है|" 

पूनम और हरिया शाम को जब घर लौटते तो हरिया खुद खाना बनाता तो पूनम उसकी चुटकी लेते हुए कहती - "हरिया तू अपनी लडकी से खेतो में मर्दों वाले काम करवाता है और खुद औरतो की तरह चुल्हा-चौका करता है|"

तो हरिया मुस्कुराते हुए कहता - "मेरी बेटी मर्दों से कम है क्या?, मूंछ होने से कोई मर्द थोड़ी न बनता है|"
और फिर दोनों जोर-जोर से हसते| लेकिन असली बात यह है कि खेतो पर काम करने के बाद हरिया पूनम को और काम करने के लिए नहीं बोल पाता था| और अब उसे आदत सी हो गयी थी रोज खाना बनाने की और पूनम को खिलाने की|

खेतो में हरिया और पूनम खूब मस्ती करते| हरिया अगर ५० किलो वजन उठाता तो पूनम ५५ किलो| और यह सिलसिला चलता रहता| और अंत में पूनम के चहरे पर विजयी मुस्कान देखने के लिए खुद हार जाता और कहता और नहीं उठा पाउँगा|

एक दिन रोज की तरह हरिया और पूनम दोनों खेतो पर काम कर रहे थे| तभी एक बड़ी सी गाडी उधर से गुज़री| और फिर गाडी में बैठे व्यक्ती ने पूछा – “ठाकुर साहब का घर कहाँ है?”

हरिया अपने काम में व्यस्त रहा तो वह व्यक्ती गाडी से उतरकर नीचे आया और फिर पुछा – “मुझे ठाकुर साहब के यहाँ जाना था?”

जब वह व्यक्ती रास्ता पूँछ रहा था तब भी और जब हरिया रास्ता बता रहा था तब भी, उसकी नजर पूनम पर ही थी, हरिया को यह अच्छा नहीं लग रहा था| तो उसने जल्दी से ठाकुर साहब के घर का रास्ता उसको बता दिया|
वह व्यक्ती चला तो गया, लेकिन जाते वक्त भी उसकी नजर गाड़ी से पूनम को ही देखे जा रहे थी|

ठाकुर साहब बहूत ही नेक इन्सान है, उनके पूर्वज यहाँ के राजा हुआ करते थे| अब राज-पाठ तो चला गया, लेकिन ठाकुर साहब आये दिन गाँव वालो की मदद करते रहते है| वह हमेशा हरिया को कहते – “हरिया पूनम को स्कूल क्यों नहीं भेजता? अभी उसकी उम्र है पढने-लिखने की| जानता है लड़कियां लड़को से किसी भी मामले में कम नहीं है|”

और हरिया यह कहकर टाल देता – “फीस कहाँ से लाऊंगा? और ये पढना चाहे तो मै मेहनत-मजदूरी करके भेज भी दू|”

और ठाकुर साहब हसते हुए पूनम से पुछते – “क्या पूनम, तुझे स्कूल जाने का मन नहीं करता|”

तो पूनम कहती – “नहीं मालिक, मुझे जो मजा खेत में काम करके, बोझ उठाके मिलता है वो मजा वो बंद स्कूल में नहीं मिलता|”


उस दिन शाम को जब हरिया और पूनम काम से लौट रहे थे, तो रस्ते में वही गाडी वाले बाबू मिले| और मिलते ही बोले – “आप तो वही है ना जो खेत में सुबह मिले थे|”

हरिया ने उत्तर दिया – “हाँ|”

फिर उन्होंने कहा – “मै ठाकुर साहब के यहाँ ठहरा हूँ, गाँव घुमने के लिए आया हूँ|”

और फिर पूनम से बोले – “आपने तो बहूत वजन उठाया है लाईये हमें दे दीजिये, हम लिए चलते है|”
पूनम ने नकारते हुए कहा – “रहने दीजिये बाबू साहब हम लिए जायेंगे, हमारा तो रोज का काम है| और वैसे भी आपके कपडे ख़राब हो जायेंगे|”

लेकिन वो नहीं माने और बोझ ले लिए| और जैसे ही पूनम ने हाथ हटाया, बाबू साहब बोझ समेत जमीं पर|
हरिया और पूनम दोनों हसने लगे| और हरिया ने मुस्कुराते हुए बाबू साहब को उठाया और कहा – “ये आपके बस की बात नहीं है|”

फिर सभी चलने लगे, उन्होंने अपना नाम अविनाश बताया| उन्होंने अपनी संस्था के बारे में बताया जो गरीब बच्चो की बुनियादी जरूरतों के साथ-साथ भविष्य निर्माण में मदद करती है|

उन्होंने पूनम की पढाई के बारे में पुछा तो हरिया में दबे हुए स्वर में कहा - “हमारी किस्मत में यह कहाँ? अगर यह खेतो पर काम नहीं करे तो हम दोनों भुखे मर जाये|”

फिर हरिया ने सारी कहानी सुना दी और तब तक हरिया का घर आ गया| हरिया अविनाश के लिए पानी लाने गया| तभी अविनाश ने पूनम से पुछा – “आगे क्या करना है? पढाई करना चाहती हो या शादी करके चुल्हा-चौका?”

पूनम ने कहा – “करना तो बहूत कुछ चाहती हूँ लेकिन बाबा ....उन्हें ऐसे नहीं छोड़ सकती|”

तबतक हरिया देशी गुड़ का एक ढेला और कुए से पानी लेकर आया|

थोड़ी देर तक बाते होती रही सूरज ढल चूका था, तो अविनाश भी जाने लगे तो हरिया उन्हें बाहर तक छोड़ने आया और अविनाश ने उन्हें पूनम की इच्छा के बारे में बताया|

हैरान होकर हरिया ने कहा – “लेकिन पूनम ने मुझसे आज तक कभी भी इस बात का जिक्र तक नहीं किया|”

तो अविनाश ने उत्तर दिया – “वह आपको दुखी नहीं देख सकती है, यही वजह है की उसने अपनो को उड़ान देने के बजाय, उसे अपने दिल के किसी कोने में दबा दिया है| लेकिन अगर आप उससे यह पहल करो तो वह मना नहीं कर पायेगी| वह आपके लिए अपनी खुशियों और सपनों का गला घोट रही है|”

हरिया ने चिंतित स्वर में कहा – “आप चलिए, मै कल आता हूँ|”

अगली सुबह हरिया भोर में ही उठा, वैसे भी उसको सारी रात नींद ही किधर आयी, बस करवटे लेता रहा| उसने पैदल ही ठाकुर साहब की हवेली का रुख कर लिया| उसने अब मन बना लिया था की वह जैसे तैसे गुजारा कर लेगा लेकिन पूनम के सपनों को इस तरह बिखरने नहीं देगा| यही सब सोचता वह तेज कदमो से हवेली की ओर बढ़ा जा रहा था| पैरो में जैसे पहिये लग गए थे|

वह पंहुचा तो बरामदे में पहले ही ठाकुर साहब और अविनाश बाबू चाय की चुस्कियां ले रहे थे|

और ठाकुर साहब ने कहा – “आओ हरिया! हम तुम्हारा ही इंतज़ार कर रहे थे| हरिया खाट पर निचे बैठने लगा तो ठाकुर साहब ने कहा – “निचे क्यों बैठता है? कुर्सी ले ले|”

और हरिया कुर्सी पर बैठ गया तो ठाकुर साहब ने पुछा – “तो क्या सोचा हरिया?”

हरिया कुछ बोल पाता उससे पहले ही ठाकुर साहब ने आगे कहा – “हरिया पूनम एक आजाद चिड़िया है, उड़ जाने दे उसे| उसके सपने बड़े है| कही ऐसा न हो जाये की तुझे देर हो जाये और उसके सपने उसके अन्दर ही मर जाये| और वो उड़ना भूल जाये| आगे तेरी मर्जी|”

फिर हरिया ने कहा – “अब मै इस चिड़िया को उड़ने से नहीं रोकना चाहता| अविनाश बाबू! इसे ले जाईये खुले आसमान में| जहाँ कोई बंदिशे न हो|”

और फिर एक संतोष और खुशी की रेखा तीनो के चेहरे पर तैर गयी|


और सुबह हरिया ने कहा – “पूनम बिटिया उठ जा| खेतो पर नहीं जाना है क्या?“

पूनम हमेशा की तरह एक बार ना कहा| तो हरिया ने फिर कहा - "चल उठ जा ... नहीं तो मै चलता हूँ|"

और पूनम उठ कर जल्दी से दरवाजे की ओर बढ़ने लगी, तो देखा अविनाश और ठाकुर साहब आकर खड़े है और बाहर उनकी गाडी भी खड़ी है| अभी उसे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था की क्या हो रहा है| फिर उसने दोनों तो प्रणाम किया| पूनम तीनो के चेहरे देखे जा रही थी और सभी के चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कराहट थी|

तभी हरिया ने कहा – “अविनाश बाबू जा रहे है शहर और तुझे भी ले जा रहे है|”

तो पूनम को एकपल के लिए तो लगा की वो सपना देख रही है, लेकिन अगले ही पल दुखी होकर बोली –“मुझे कही नहीं जाना है| और आप कैसे मान गए की मुझे कही जाना है, मुझे आपके साथ रहना है| खेतो पर जाना है और आपके हाथ का बना स्वादिष्ट खाना खाना है, बस|”

तभी ठाकुर साहब बोले – “बिटिया यह तेरे भले के लिए है| वहां तू पढाई के साथ-साथ जो चाहे कर सकती है| और तुमने ही तो अविनाश से कहा की तुम्हे पढना है, आगे बढ़ना है|”

पूनम ने कहा – “वो तो मैंने ऐसे ही कह दिया था, लेकिन मै बाबू को छोड़कर कही नहीं जाउंगी|”

लेकिन फिर जब हरिया, ठाकुर साहब और अविनाश ने मिलकर उसे समझाया की हरिया उसके बिना भी अपनी जिन्दगी जी लेगा और ठाकुर साहब उसका ख्याल रखेंगे| और वो हमेशा के लिए थोड़ी न जा रही है, कुछ ही दिनों की तो बात है वो वापस आ जायेगी| और अविनाश ने कहा की छुट्टियों में तो तुम इनसे मिलने आ ही सकती हो| तब जाकर वह जाने के लिए राजी हुई|

हरिया ने उसकी तैयारी इस तरह से शुरू की जैसे कोई आपने लड़की को शादी के बाद विदाई के वक्त करता है| और फिर पूनम और अविनाश गाडी से शहर की ओर चलने को तैयार थे, हरिया के अंदर तो जैसे ज्वार उमड़ रहा था लेकिन उसने उसे बाहर नहीं आने दिया| और फिर भारी मन से उसने पूनम को विदा किया|

३ साल बीत चुके थे, पूनम को गए हुए| हरिया भी बूढ़ा हो गया था, ठाकुर साहब की हवेली पर रखवाली का काम मिल गया था, खाने को भी मिल जाता था| कभी – कभी ठाकुर साहब की फोन पर पूनम का फ़ोन भी आता तो बात हो जाती|


लेकिन अब हरिया को पूनम से मिलने की इच्छा ने वृछ का रूप ले लिया था, अब वह पूनम से मिलकर उसे देखने चाहता था, उससे बात करना चाहता था| मन ही मन उसकी यादो में खो जाता अब तो पूनम बड़ी हो गयी होगी, पता नहीं कैसी दिखती होगी| दुबली तो नहीं हो गयी होगी|....वगैरह ......वगैरह|

एक दिन पूनम का फ़ोन आया तो ठाकुर साहब ने बुलाया, और ठाकुर साहब ने कहा – “हरिया ये ले पूनम बिटिया का फ़ोन है|”

हरिया ने फ़ोन लिया तो पूनम ने बताया की आज वह टीवी पर आने वाली है, हरिया को खुशी का ठिकाना न रहा| वह और भी बहूत कुछ पूछना चाहता था पूनम से लेकिन फ़ोन कट गया|

ठाकुर साहब और उनका पूरा परिवार टीवी के सामने था| और ठाकुर साहब ने हरिया को भी बुलवाया और बैठने के लिए कहा| सभी की नज़ारे टीवी की ओर और सिर्फ पूनम को ढूढती हुई| तभी पूनम बिटिया दिखाई दी सभी खूब चिल्ला रहे थे, सभी लोग खाभी टीवी की ओर देखते कभी हरिया की ओर| और हरिया को तो जैसे सारा जहाँ मिल गया था|

हरिया भी खूब चिल्लाना चाहता था, रोना भी आ रहा था| गर्व से छाती फूल गयी थी, सब सिर्फ पूनम की ही बात कर रहे थे| उसकी बेटी के ही बात कर रहे थे|

सभी लोगो हरिया को बधाई दे रहे थे, लेकिन हरिया को अभी तक पूनम के टीवी पर आने और लोगो के बधाई देने का कारण समझ नहीं आ रहा था|

तभी ठाकुर साहब ने बताया की पूनम बिटिया अपने देश के लिए खेल रही है कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा लिया है उसने| फिर ठाकुर साहब ने कहा – “पूनम बिटिया ने तुम्हारा और इस गाँव का ही नहीं पूरे देश का नाम रौशन कर दिया है|”


हरिया को लगा जैसे अभी अभी किसी ने उसके सीने पर मरहम लगाया हो, जो जख्म पूनम के जाने पर हुआ था|


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रविवार, 5 अप्रैल 2020

Maha Shivratri / महाशिवरात्री

Maha Shivratri / महाशिवरात्री


Maha Shivratri / महाशिवरात्री


आज सुबह – सुबह दीनानाथ पाण्डेय जी, जो माधोपुर ग्राम के सबसे धार्मिक व्यक्ती है, हमेशा की तरह, हाथ में पूजा का सामान लेकर मंत्रोच्चार करते हुए तेजी से मंदिर की तरफ चले जा रहे थे| जैसे की उन्हें मंदिर और भगवान के आलावा कुछ भी दिखाई नहीं पड़ रहा है| मंदिर से लगभग २० कदम की दूरी पर कबीरा मैले कपडे में बैठा हुआ था| कबीरा माधोपुर गाँव का निवासी नहीं था, कुछ बर्ष जब आस-पास के कई गाँवों में सुखा पड़ रहा था, तभी यह इस गाँव में आया और इसी शिव मंदिर के पास आकर रहने लगा| खाने का कोई ठिकाना नही होता था, बस जब मन में आता रामायण की चौपाईया गाता रहता था| उसने पाण्डेय जी को आते हुए देख रखा था| जैसे ही पाण्डेय जी उसके नजदीक आये, उसने पाण्डेय जी का रास्ता रोकते हुए कहा – “पंडित कुछ खाने को दो ना|”

पाण्डेय जी ने झिझकारते हुए कहा – मेरे पास खाने के लिए कुछ नहीं है| वैसे भी आज महाशिवरात्री है, मेरे पास दूध के आलावा, कुछ भी नहीं है|”



तो कबीरा ने कहा - "पाण्डेय जी! दूध ही दे दीजिये| भूखे को भोजन कराना तो पुण्य का कार्य होता है, और मुझे तो दो दिनों से रोटी नहीं नसीब हुआ है|"

पाण्डेय जी ने चिढ़ते हुए कहा - "अरे मुर्ख, जो वस्तु भगवान के नाम पर लिया जाता है उसे सिर्फ भगवान को ही अर्पण करना होता है| अगर उसे खाने के लिए किसी को दिया जाये तो खाने और खिलाने वाले दोनों पाप के भागी होते है| और महाशिवरात्री के दिन के दिन भगवान शंकर का दूध से अभिषेक किया जाता है, तो मनुष्य पुण्य का भागी बनता है|"

और अपनी बात बात को खत्म करते हुए अपने पैरो से कबीरा के पैरो तो धकेलते हुए आगे की ओर बढ़ गए| 

कबीरा पुनः रामायण की चौपाईयाँ गाता हुआ मंदिर की ओर चल पड़ा -:



पाण्डेय जी ने मंदिर में पहुँचकर शिवलिंग का दूध से अभिषेक किया, और कबीरा ने मंदिर के पीछे खड़े होकर नाली से आते हुए दूध से अपनी क्षुधा शांत की| और फिर मुस्कुराते हुए गाने लगा :-




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