Friday, July 21, 2017

राष्ट्रपती चुनाव

शुभ संध्या मित्रो,

काफी खीचतान के बाद ही सही, लेकिन राम नाथ कोविंद जी भारत देश के प्रथम व्यक्ती चुने गए| देश को इससे कितना फायदा होगा| फायदा तो होगा, जरूर होगा, लेकिन अगर कोविंद जी बिना, किसी खीचतान के राष्ट्रपती चुन लिए गए होते| इस देश का सबसे में जो कुछ भी होता है, जाती और धर्म पर ही शुरू होता है और उसी पर ख़त्म| चाहे वो गाव के सरपंच के लिए चुनाव हो या प्रधानमंत्री पद के लिए चुनाव हो| मन की इसी विभीन्न जातीय और धार्मिक विविधताओं के लिए भारत वर्ष विश्व विख्यात है, लेकिन अब यही हमारे लिए जी का जंजाल बन चुका है| अब राष्ट्रपती चुनाव को ही ले लीजिये, भाजपा के पास राष्ट्रपती पद के लिए कई उपयुक्त दावेदार थे| और मीडीया ने तो चुन भी लिया था, लेकिन तभी, भाजपा ने जातीय ट्रंप कार्ड खेलकर कांग्रेस सहित कई विपक्षी पार्टियों को चारो खाने चित्त कर दिया| अब कांग्रेस के पास दलित उम्मीदवार उतारने के अलावा कोई विकल्प बचा ही नहीं| तो उन्होंने भी पूर्व लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार को मैदान में उतारकर, इसे राष्ट्रपती चुनाव से दलित और सर्वश्रेष्ठ दलित का चुनाव बना दिया| और ऐसा नहीं है यह पहली बार हुआ है या सिर्फ कांग्रेस ही जाति या धर्म की राजनिती करती है| बल्कि हमारे देश की सम्पूर्ण राजनिती जाति और धर्म से प्रेरित है| कभी यह हिन्दू - मुस्लिम, कभी सवर्ण - दलित औरज तो हद हो गयी, अब दलित और अधिक दलित के रूप में यह सामने आया है| जो भी है विरोध वैचारिक होना चाहिए, विरोध सही और गलत के बीच होना चाहिए, न की जाति और धर्म के नाम पर|


Tuesday, July 18, 2017

जिम कार्बेट नेशनल पार्क, नैनीताल, उत्तराखंड

सुप्रभात मित्रों,
एक बार फिर से स्वागत है आप सभी का हमारे जीवन पथ पर|

जैसा की पहले पोस्ट में मै आपके साथ यह जानकारी साझा कर चूका हूँ की कैसे हमने जिम कार्बेट नेशनल पार्क, नैनीताल, उत्तराखंड जाने की तैयारी शुरू की और कैसे उसे अंजाम दिया| अब मै  जिम कार्बेट नेशनल पार्क, नैनीताल, उत्तराखंड  की कुछ सुन्दर तस्वीरे आप सभी मित्रो से साथ साझा कर रहा हूँ, शेष तस्वीरों के साथ मै फिर मिलूंगा|








Friday, July 14, 2017

तबेले मे हिन्दू- मुस्लिम





आज एक खास बातचीत के अंश आपके सामने रखने जा रहा हूँ|

मैं आज मनोज भाई के तबेले पर दूध लेने गया, तो मैने देखा काफी शोर-शराबा हो रहा था| मैने पास जाकर मनोज भाई से इसका कारण पूँछा, तो उन्होने बतलाया -  कुछ गायें-भैसे और बकरियाँ अनशन पर है|
मैने पूछा - क्यो भाई?
तो उन्होने कहा - क्या बताऊँ साहब, जबसे यह बैल (नेता) मेरे तबेले के पास रहने आया है, तभी से यह बवाल चल रहा है| इन्होने तो दूध देना ही बंद कर दिया है|

तो मैने आगे पूछा की इनकी मांगे क्या है|

तो उन्होने बतलाया की जो बकरीयाँ है, वो कह रही है की हमे गायों द्वारा गैर धर्म का कहकर अपमानित किया जा रहा है| हम तो सूखा गोबर करते है, लेकिन ये गायें हम पर गीला गोबर के छींटे मारती है| ये अपनी अधिक जनसंख्या के कारण आये दीन हम पर अत्याचार करती रहती है| हम कमजोर और लाचार है, हमे आरक्षण मिलने ही चाहिये हमे हप्ते मे एक दिन दूध न देने की परमीशन मिले| और उचित सुरक्षा मुहैया कराई जाये| जब तक हमारी मांगे पुरी नही होती, यह आन्दोलन चलता रहेगा|

उन्होने आगे कहा - आब गायों की समस्या भी सुन लीजिये, उनका कहना है की हम आपके तबेले में पहले से रहते आयें है, और अब ये दूसरे धर्म के लोग आकर हमारा अधिकार छीनना चाहते है| पहले सारा तबेला हमारा था, आज उन्होने आधे तबेले पर अतिक्रमण कर लिया है| पहले आप हमे ही प्यार से चारा खिलाते थे, अब आप उनको भी प्यार से चारा खिलाते हो| हम हमारे साथ अन्याय सहन नही करेंगे|  हम उच्च कोटी के जानवर है, लोग हमारा मूत्र तक पी जाते है, केलिन ये लोग यहाँ आकर गंदगी फैलाते है| इन्हे बाहर हटाया जाये, और हमे इनसे अच्छी सुविधायें दी जाये| नही तो यह आन्दोलन चलता रहेगा|

उन्होने फिर मुझसे पूछा - अब आप ही बताये हम क्या करें|

फिर मैने धीरे से दुध का बर्तन लिया और वापस घर की तरफ बढ चला|

तो मनोज ने पूछा - क्या हुआ आप चले क्यो जा रहे है| 

मैने कहा - एक यही तो बचे थे, राजनिती से, लेकिन जब राजनेताओं ने यहाँ भी धर्मांधता का बीज बो दिया, तो इनके से द्वेष की बदबू आनी तय है| 

Saturday, July 1, 2017

चिट्ठा दिवस


आप सभी को ब्लॉगर दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ|
ब्लॉग तो पहले भी लिखे जा रहे थे, लेकिन हिन्दी भाषा में ब्लॉगो के लिखे जाने की शुरुआत कुछ वर्ष पहले हुई| लेकिन शुरुवात मे हिन्दी प्रेमीयों के पढने का माध्यम या तो पुस्तकों को बनाते थे या पत्रिकाओं को| लेकिन धीरे-धीरे हिन्दी ब्लॉगो पर पाठको की संख्या मे असाधारण बढ़ोतरी ने हिन्दी लेखको को ब्लॉग लिखने के लिए प्रोत्साहित किया| और आज तो हिन्दी पाठको के लिये एक सशक्त माध्यम के रूप मे उभरा है हिन्दी ब्लॉगींग| और ब्लॉग से हिन्दी के दिन सुधरे, ना सुधरे लेकिन हिन्दी से ब्लॉगींग के दिन जरूर सुधरेंगे|
और हमारी तो यही विश्वास है कि हिन्दी चिट्ठा और चिट्ठाकार इसी तरह प्रगति करते रहे| सभी ब्लाग लेखको और पाठको को चिट्ठा दिवस की हार्दिक बधाई|

#हिंदी #ब्लॉग

मेरे मन की

मेरी पहली पुस्तक "मेरे मन की" की प्रिंटींग का काम पूरा हो चुका है | और यह पुस्तक बुक स्टोर पर आ चुकी है| आप सब ऑनलाइन गाथा ...